sangeeta singh bhavna

Just another Jagranjunction Blogs weblog

22 Posts

1709 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 23046 postid : 1227439

--''हे भारत के वीर ''

Posted On: 12 Aug, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हे भारत के वीर
तू क्यों नींद में पड़े बेखबर
सो रहे हो …….?
उठो,और आँखें खोलो
देखो,प्राची-दिशा का ललाट
सिंदूरी-रंजित हो उठा है
अब सोने का समय नहीं है
अगर सोना ही है तो,
अनंत निद्रा की गोद मे जाकर सो जा
माया -मोह-ममता को त्याग कर
एक नए इतिहास की सृजन कर
तेरी माँ, तेरी शस्यश्यामला
तुझे पुकार रही है …….
उसके आंसुओं की एक-एक बूंद की
सौगंध है तुझे,
उठ ,और राष्ट्र का मुख उज्जवल कर दे
तुम ही हो,जिसके अथक प्रयास से
भारत का भाग्य-निर्मित है
राष्ट्र के भविष्य की सफलता के बीज
भी तुम ही हो ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उठो ,और उसका बेड़ा पार करो
बोलो अपने मुक्तकंठ से-
वन्देमातरम…..वन्देमातरम ….वन्देमातरम …!

संगीता सिंह ”भावना”

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kamleshmaurya के द्वारा
August 21, 2016

अत्यंत मनोहारी कविता है यह आपकी ।


topic of the week



latest from jagran